Saturday, 18 November 2017

PIB OCT 1ST WEEK


1.
राष्‍ट्रपति ने विश्व क्‍लबफुट सम्‍मेलन का उद्घाटन किया
राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज (01 नवम्‍बर, 2017) दिल्‍ली में स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के सहयोग से क्‍योर इंडिया द्वारा आयोजित पहले वैश्विक क्‍लबफुट सम्‍मेलन का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्‍ट्रपति ने कहा कि क्‍लबफुट हड्डी से संबंधित खराबी है जो जन्‍म के समय से होती है। यदि प्रारंभ में इसका इलाज नहीं होता है तो इससे स्‍थायी विक्‍लांगता हो सकती है। यह बच्‍चे के सामान्‍य रूप से चलने और उसके आत्‍मविश्‍वास को प्रभावित करता है। इससे बच्‍चे की स्‍कूली शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और वह अपने सामर्थ के अनुसार अपने सपने को पूरा नहीं कर पाता।
राष्‍ट्रपति महोदय ने कहा कि भारत में विक्‍लांगता 10 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। दिव्‍यांगजनों को भी जीवन के प्रत्‍येक क्षेत्र में समान अवसर मिलने चाहिएं। उन्‍हें सामाजिक और पेशे के अनुसार मुख्‍य धारा में लाने की जिम्‍मेदारी हमारी होनी चाहिए। कई प्रकार की विक्‍लांगता का इलाज हो सकता है या उनसे बचाव किया जा सकता है। बचाव, इलाज और उन्‍हें मुख्‍य धारा में शामिल करने का कार्य समान्‍तर रूप से होना चाहिए।
राष्‍ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि पोलियोमाईलिटिस के नये मामले प्रकाश में नहीं आये हैं और यह पूरी तरह समाप्‍त किया जा चुका है। पोलियो लोको-मोटर विक्‍लांगता का एक प्रमुख कारण था, परंतु पिछले 6 वर्षों के दौरान पारालेसिस पोलियोमाईलिटिस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। न सिर्फ भारत बल्कि विश्‍व स्‍तर पर जन स्‍वास्‍थ्‍य के इतिहास में यह एक बड़ी सफलता है। इससे हमे विक्‍लांगता के दूसरे प्रकारों को समाप्‍त करने और क्‍लबफुट की चुनौती का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
राष्‍ट्रपति महोदय ने कहा कि उन्‍हें इस बात की खुशी है कि सरकारी अस्‍पताल क्‍योर इंटरनेशनल इंडिया के साथ मिलकर ज्‍यादा से ज्‍यादा बच्‍चों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। यह कार्यक्रम भारत के 29 राज्‍यों में चल रहा है। इन सफलताओं के पीछे हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रत्‍येक वर्ष केवल 8 हजार मामले ही इलाज के लिए आते हैं। यह एक छोटी संख्‍या है क्‍योंकि प्रतिवर्ष क्‍लबफुट से ग्रसित 50 हजार बच्‍चों का जन्‍म होता है। 2022 में भारत स्‍वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करेगा। यह हमारा राष्‍ट्रीय संकल्‍प होना चाहिए कि ज्‍योंहि किसी बच्‍चे के क्‍लबफुट से ग्रसित होने का मामला प्रकाश में आता है उसकी पहुंच इलाज की सुविधाएं तक हो।

2.
मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण अधिनियम, 1993 में संशोधन को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण अधिनियम, 1993 में संशोधन के लिए राष्‍ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2017 शीर्षक से इस विधेयक को संसद में पेश करने के लिए अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसमें एनसीटीई की अनुमति के बिना शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले केन्‍द्रीय/राज्‍य/ विश्‍वविद्यालयों को भूतलक्षी प्रभाव से मान्‍यता प्रदान करने का प्रावधान है।
इस संशोधन में एन सी टी ई मान्‍यता के बिना शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करने वाले केन्‍द्र/राज्‍य/संघ शासित क्षेत्र के वित्‍तपोषित संस्‍थानों/विश्‍वविद्यालयों को अकादमिक सत्र 2017-2018 तक भूतलक्षी प्रभाव से मान्‍यता प्रदान करने का प्रावधान है। यह भूतलक्षी प्रभाव के मान्‍यता एक बारगी उपाय के रूप में दी जा रही है ताकि इन संस्‍थानों से उत्‍तीर्ण हुए। पंजीकृत छात्रों के भविष्‍य को खतरा न हो।
इस संशोधन से इन संस्‍थाओं/विश्‍वविद्यालयों में पढ़ रहे अथवा यहां से पहले ही उत्‍तीर्ण हो चुके छात्र शिक्षक के रूप में रोजगार पाने के पात्र हो सकेंगे। ऊपर उल्लिखित लाभों को प्राप्‍त करने की दृष्टि से स्‍कूल शिक्षा व साक्षरता विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय यह संशोधन लेकर आया है।
शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम जैसे बी.एड और डिप्‍लोमा इन इलेमेंट्री एजुकेशन शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चलाने वाले सभी संस्‍थानों को एनसीटीई अधिनियम की धारा 14 के अन्‍तर्गत राष्‍ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण परिषद् से मान्‍यता लेनी होगी। इसके अलावा, ऐसे मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍थानों/ विश्‍वविद्यालयों को एनसीटीई अधिनियम की धारा 15 के अन्‍तर्गत पाठ्यक्रमों की अनुमति प्राप्‍त करनी होगी।
एनसीटीई ने सभी केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों और राज्‍य सरकारों/राज्‍य विश्‍वविद्यालयों/ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थानों (डायट) को इस संबंध में लिखकर अवगत कराया है कि वे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की शुरूआत करने के लिए पूर्व अनुमति प्राप्‍त करने को अनिवार्य कानूनी प्रावधान है और उन्‍हें यह अवगत कराने के लिए 31.3.2017 तक का समय दिया गया है कि यदि कोई ऐसा संस्‍थान/विश्‍वविद्यालय एनसीटीई की अनुमति के बिना कोई पाठ्यक्रम चला रहे हैं तो वे विगत मुद्दों के एक-बारगी समाधान के लिए एनसीटीई को इस बारे में अवगत करायें।
पृष्‍ठभूमि:
एनसीटीई अधिनियम 1 जुलाई, 1995 को प्रभाव में आया था और जम्‍मू व कश्‍मीर राज्‍य को छोड़कर यह देशभर में लागू है। इस अधिनियम का मुख्‍य उद्देश्‍य शिक्षक प्रशिक्षण प्रणाली की आयोजना और समन्वित विकास, प्रणाली, विनियमन की प्राप्ति का लक्ष्‍य व उक्‍त प्रणाली में मानदण्‍डों व मानको का समुचित अनुरक्षण सुनिश्चित करना है। अधिनियम के लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने की दृष्टि से, शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को मान्‍यता देने के लिए इस अधिनियम में पृथक से प्रावधान किए गए हैं और मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍थानों/विश्‍वविद्यालयों द्वारा अनुपालनार्थ मार्गदर्शी-निर्देश निर्धारित किए गए है।

3.
भारत – रूस का संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास ‘इन्‍द्र-2017’  सफलतापूर्वक समाप्‍त हुआ  
भारत – रूस के बीच तीनों सेनाओं का संयुक्‍त अभ्‍यास ‘इन्‍द्र 2017’ का सफलतापूर्वक संचालन 19 से 29 अक्‍टूबर 2017 तक रूस के ब्‍लादिबोस्‍तक में हुआ। इस अभ्‍यास के लिए इन्‍द्र का नाम इंडिया के आईएनडी और रसिया के आरए से लिया गया है। अब तक इन्‍द्र अभ्‍यास के दौरान तीनो सेनाओं – थल, वायु व नौसेना - के अभ्‍यास अलग - अलग होते थे। 2003 से लेकर अब तक रूसी डिफेंस फोर्स के साथ 17 ऐसे अभ्‍यास हो चुके हैं। इन्‍द्र 2017 के तहत पहली बार भारत और रूस के तीनों सेनाओं का संयुक्‍त अभ्‍यास हुआ। रूस ने भी पहली बार अपनी जमीन पर तीनों सेनाओं के संयुक्‍त अभ्‍यास का संचालन किया।
इन्‍द्र 2017 की थीम थी – ‘यूएन की इच्‍छा के अनुरूप किसी देश के अनुनय पर अंतरराष्‍ट्रीय आतंकवाद गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए संयुक्‍त बल द्वारा मुहिम तैयार करना और संचालन करना।‘
इस संयुक्‍त अभ्‍यास में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के 900 सैन्‍यकर्मियों ने तथा रूस के 1000 सैन्‍यकर्मियों ने हिस्‍सा लिया। इस अभ्‍यास का संचालन सर्गेवेस्की संयुक्त शस्त्र प्रशिक्षण रेंज, केप क्लर्क प्रशिक्षण क्षेत्र और जापान के समुद्र में किया गया।
यह एक एतिहासिक अवसर था जब विश्‍व के दो महान सशस्‍त्र सेनाओं ने हाथ मिलाया और संयुक्‍त अभ्‍यास किया। दोनों देशों की सेनाओं को एक - दूसरे द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली सर्वोत्‍तम अभ्‍यासों की जानकारी मिली। तीनों सेनाओं के पहले भारत-रूस संयुक्‍त अभ्‍यास के दौरान जमीन पर, समुद्र में और हवा में प्रशिक्षण और प्रतिप्रशिक्षण अभ्‍यास किये गये। यह अभ्‍यास दोनों सेनाओं के बीच लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए आपसी तालमेल का उदहारण है।
इन्‍द्र 2017 संयुक्‍त अभ्‍यास पूरे विश्‍व में होने वाले भविष्‍य के सैनिक अभ्‍यासों के लिए एक मील का पत्‍थर साबित होगा। यह और भी महत्‍वपूर्ण है कि दोनों देशों ने यह उपलब्धि उस समय प्राप्‍त की है जब हम भारत - रूस मैत्री की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।

4.
 फिजी, किरीबाती, टोंगा, वानुआतू, नौरू, तुवालू और कुक आईलैंड्स में अक्टूबर, 2017 से मार्च, 2018 तक भारत उत्सव का आयोजन
अक्टूबर, 2017 से मार्च, 2018 तक फिजी, किरीबाती, टोंगा, वानुआतू, नौरू, तुवालू और कुक आईलैंड्स में भारत उत्सव का आयोजन किया जाएगा। उत्सव के दौरान भारतीय संस्कृति को पेश किया जाएगा, जिनमें शास्त्रीय और लोक नृत्य, संगीत, खान-पान और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन शामिल है। यह कार्यक्रम फिजी के 6 शहरों सुवा, नाडी, लाआटोका, लबासा, बा और किरीबाती, टोंगा, वानुआतू, नौरू, तुवालू और कुक आईलैंड्स की राजधानियों में संपन्न होगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है-
  1. अक्टूबर, 2017 के प्रथम सप्ताह में फिजी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती के अवसर पर ‘एकात्म मानववाद’ पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन।
  2. 13-20 अक्टूबर, 2017 को फिजी में खाद्य उत्सव का आयोजन।
  3. 23-30 अक्टूबर, 2017 को फिजी में सात सदस्यी साबरी ब्रदर्स दल द्वारा कव्वाली कार्यक्रम।
  4. 2-14 नवंबर, 2017 को फिजी, किरीबाती, टोंगा और वानुआतू में गुंजन नृत्य अकादमी, कटक स्थित श्रीमती मीरा दास दल द्वारा ओडिसी नृत्य।
  5. 25-30 नवंबर, 2017 को कला क्षेत्र द्वारा रामायण प्रकरण ‘जटायु मोक्षम्’ का प्रस्तुतीकरण।
  6. 24-26 नवंबर, 2017 को फिजी में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन।
  7. 12-17 जनवरी, 2018 को फिजी और कुक आईलैंड्स में डॉ. यशोदा ठाकोर द्वारा कुचीपुड़ी नृत्य और योग प्रदर्शन।
  8. 25 जनवरी-03 फरवरी, 2018 को फिजी, नौरू और तुवालू में बॉलीवुड नृत्य और संगीत का आयोजन।
  9. 16-18 फरवरी, 2018 को फिजी में अविष्कार मंच-कला अकादमी द्वारा लोक नृत्य का प्रस्तुतीकरण।
  10. 16-18 मार्च, 2018 को फिजी में रामानुज शर्मा के लोक संगीत दल आरूग का प्रस्तुतीकरण। 
5.  
प्रधानमंत्री विश्व खाद्य भारत समारोह – 2017 का उद्घाटन करेंगे

भारत खाद्य क्षेत्र की वैश्विक कंपनियों का स्वागत करने के लिए तैयार
 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 03 नवंबर, 2017 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में विश्व खाद्य भारत समारोह (डब्ल्यूएफआई) – 2017 का उद्घाटन करेंगे। डब्ल्यूएफआई सर्वाधिक अपेक्षित अंतर्राष्ट्रीय मेगा खाद्य समारोह है। भारत 3-5 नवंबर, 2017 के दौरान नई दिल्ली में खाद्य क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के वैश्विक निवेशकों और उद्योगपतियों के अब तक के सबसे बड़े समागम का स्वागत करेगा। केन्द्रीय मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा आयोजित विश्व खाद्य समारोह का उद्देश्य खाद्य अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करना और वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए भारत को एक पसंदीदा निवेश गंतव्य तथा सोर्सिंग हब के रूप में स्थापित करने के द्वारा किसानों की आय को दोगुनी करने के विजन को प्राप्त करना है। पहली बार भारत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए ऐसे किसी समारोह की मेजबानी कर रहा है। विश्व खाद्य भारत मंच एक वैश्विक खाद्य फैक्टरी के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत बनाएगा और यह देश द्वारा खाद्य सुरक्षा अर्जित किए जाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
भारत में अगले तीन वर्षों के दौरान खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में दस बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किए जाने तथा दस लाख रोजगारों का सृजन किए जाने की उम्मीद है। विश्व खाद्य क्षेत्र भारत समारोह में दो हजार से अधिक प्रतिभागियों, 30 देशों की 200 से अधिक कंपनियों, 18 मंत्रिस्तरीय तथा व्यवसाय शिष्टमंडल तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की सभी अग्रणी घरेलू कंपनियों के सीईओ समेत लगभग 50 वैश्विक सीईओ और भारत में 28 राज्यों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। जर्मनी, जापान एवं डेनमार्क विश्व खाद्य समारोह के साझेदार देश हैं। इटली और नीदरलैंड फोकस देश हैं। विख्यात शेफ संजीव कपूर द्वारा विशेष रूप से सृजित प्रायोगिक प्लेटफॉर्म ‘फूड स्ट्रीट’ एक जीवंत और गतिशील क्षेत्र होगा, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, समसामयिक प्रस्तुतियों एवं फ्यूजन फूड सृजित करने के लिए इसकी पैदावारों के विविध अनूठेपन का जश्न मनाने के लिए भारतीय अवयवों, स्वादों एवं सुंगधों का उपयोग करते हुए भारतीय एवं विदेशी पाक कलाओं को प्रदर्शित करेगा। विज्ञान भवन में उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नेशनल स्टेडियम के आगे इंडिया गेट लॉन पर फूड स्ट्रीट का दौरा करेंगे।
उद्घाटन समारोह के अवसर पर केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के साथ-साथ तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी होंगे। वैश्विक एवं घरेलू क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों के सीईओ आदि के अलावा कई देशों के मंत्रिस्तरीय शिष्टमंडल भी उद्घाटन सत्र में उपस्थित रहेंगे।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय वित्त एवं कंपनी मामले मंत्री श्री अरुण जेटली एवं केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री सुरेश प्रभु के साथ वैश्विक एवं घरेलू क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों के सीईओ के विशिष्ट सीईओ गोलमेज बैठकों का भी कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। विश्व खाद्य क्षेत्र भारत समारोह में भाग लेने के लिए आए वैश्विक खाद्य कंपनियों एवं भारत के उद्योगपतियों की सूची में नेस्ले के निदेशक मंडल के अध्यक्ष श्री पॉल बल्के, मेट्रो कैश एंड कैरी के मुख्य संचालन अधिकारी एवं सीईओ श्री पीटर बून, जीएसके कंज्यूमर हेल्थ केयर के सीईओ श्री ब्रायन जे मेकनामारा, फूड यूनिलीवर की प्रेसिडेंड सुश्री आमांडा सोरे, अल-शराफ ग्रुप के श्री शराफुद्दीन शराफ; लुलु ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री यूसुफ अली, फ्यूचर ग्रुप के सीईओ श्री किशोर बियानी, वॉलमार्ट इंडिया के सीईओ श्री कृष अय्यर; अमेजन, इंडिया के सीईओ श्री अमित अग्रवाल आदि शामिल हैं। अग्रणी कंपनियों के एशिया प्रशांत (एपीएसी) नेतृत्व सहित कुल 60 वैश्विक सीईओ भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के 100 से अधिक शीर्ष कंपनियों के अग्रणी सीईओ के साथ परस्पर बातचीत करेंगे। तीन दिनों के दौरान एक हजार से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकों के आयोजित किए जाने की उम्मीद है।
15 देशों के 200 से अधिक सदस्यों के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंत्रिस्तरीय एवं व्यवसाय शिष्टमंडल बी-टू-बी/बी-टू-जी बैठकों में भाग लेंगे। इस विशाल समारोह में आठ क्षेत्रवार सम्मेलन, भारत के वित्त मंत्री विशिष्ट अतिथि के रूप में ‘भारत एक पसंदीदा गंतव्य’ पर दो पूर्ण सत्रों का, भारत के खाद्य मानकों एवं सुरक्षा प्राधिकरण के सहयोग से ‘एक राष्ट्र, एक खाद्य कानून- खाद्य क्षेत्र में निवेश के लिए एक सक्षमकारी नियामकीय वातावरण’ का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, 20 राज्य सत्रों एवं 6 देश सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा। समारोह के दौरान 7 क्षेत्रवार प्रकाशन भी जारी किए जाएंगे।
 खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का थीम पवेलियन उत्पादों, उत्पाद उपलब्धता का भू-मानचित्रण एवं मेगा फूड पार्कों के लिहाज से विश्व को भारत की प्रस्तुति का एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। इस समारोह को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, विदेश मामले मंत्रालय एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है।

6.
भारत- कज़ाख़िस्तान संयुक्त अभ्यास ‘प्रबल दोस्तक 2017’ का शुभारंभ
भारतीय सेना और कज़ाख़िस्तान के बीच आज से हिमाचल प्रदेश के बाकलो में चौदह दिन के संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास ‘प्रबल दोस्तक 2017’ का शुभारंभ हुआ। इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को बढ़ाने के अलावा दोनों सेनाओं की आंतरिक-क्षमता को मजबूत बनाना है। प्रशिक्षण दल में भारतीय सेना की 11 वीं गोरखा राइफल्स का सशक्त दस्ता और कज़ाख़िस्तान सेना का भी समान दस्ता शामिल है।

7. 
गाइडेड बम का सफल परीक्षण
स्‍वदेश में विकसित हल्‍के वजन वाले गाइडेड बम ‘सॉ’ (एसएएडब्‍ल्‍यु, स्‍मार्ट एनटी एयर‍फील्‍ड वीपन) का ओडिशा के चांदीपुर स्थित आईटीआर रेंज में भारतीय वायुसेना के विमान से सफल परीक्षण किया गया। विमान से निकले गाइडेड बम ने सूक्ष्‍म नेवीगेशन प्रणाली का उपयोग करते हुए 70 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्‍य को परिशुद्धता के साथ प्राप्‍त किया। विभिन्‍न स्थितियों और दूरियों को ध्‍यान में रखते हुए तीन परीक्षण किये गये और सभी सफल रहे। इस गाइडेड बम का विकास डीआरडीओ के अन्‍य विभागों और भारतीय वायु सेना की सहायता से डीआरडीओ के रिसर्च सेन्‍टर इमारत (आरसीआई) द्वारा किया गया है।
रक्षामंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने भारतीय वायु सेना और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को इन सफल परीक्षणों के लिए बधाई दी। डीआरडीओ के अध्‍यक्ष और रक्षा आर एंड डी विभाग के सचिव डॉ. एस.क्रिस्‍टोफर ने टीम को बधाई दी और कहा कि ‘सॉ’ को जल्‍द ही सशस्‍त्र सेनाओं में शामिल किया जाएगा। मिसाइल और रणनीतिक प्रणाली के महानिदेशक डॉ. जी.सतीश रेड्डी ने कहा कि गाइडेड बम स्‍वदेशी क्षमता विकास में एक मील का पत्‍थर है।


8.
डाक टिकट संग्रह को प्रोत्‍साहन देने के लिए दीनदयाल ‘स्‍पर्श’ योजना का शुभारंभ : मनोज सिन्‍हा
संचार मंत्री श्री मनोज सिन्‍हा ने आज डाक टिकट संग्रह को प्रोत्‍साहन देने के लिए दीनदयाल स्‍पर्श योजना का शुभारंभ किया। यह पूरे भारत के स्‍कूली बच्‍चों के लिए छात्रवृत्ति योजना है। ‘स्‍पर्श’ योजना के तहत कक्षा VI से IX तक उन बच्‍चों को वार्षिक तौर पर छात्रवृत्ति दी जाएगी, जिनका शैक्षणिक परिणाम अच्‍छा है और जिन्‍होंने डाक टिकट संग्रह को एक रूचि के रूप में चुना है। सभी डाक सर्किलों में आयोजित होने वाली एक प्रतियोगी प्रक्रिया के आधार पर डाक टिकट संग्रह में रूचि रखने वाले छात्रों का चयन किया जाएगा। योजना का शुभारंभ करने के पश्‍चात मीडिया को जानकारी देते हुए श्री सिन्‍हा ने कहा कि योजना के अंतर्गत 920 छात्रवृत्तियां देने का प्रस्‍ताव है। प्रत्‍येक डाक सर्किल अधिकतम 40 छात्रों का चयन करेगा। कक्षा VI, VII, VIII, और IX  में प्रत्‍येक से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा। छात्रवृत्ति की राशि प्रति माह 500 रूपये (6000 रूपये वार्षिक) है।
मंत्री महोदय ने कहा कि छात्रवृत्ति पाने के लिए बच्‍चे को पंजीकृत स्‍कूल का छात्र होना चाहिए, स्‍कूल में डाक टिकट संग्रह क्‍लब होना चाहिए तथा बच्‍चे को इस क्‍लब का सदस्‍य होना चाहिए। यदि स्‍कूल में डाक टिकट संग्रह नहीं है, तो जिन छात्रों के डाक टिकट संग्रह के खाते हैं, उन्‍हें भी योग्‍य समझा जाएगा। जो स्‍कूल इस प्रतियोगिता में भाग लेगा उसे विख्‍यात डाक संग्रहकर्ताओं की सूची में से एक मार्गदर्शक चुनने का अवसर दिया जाएगा। यह मार्गदर्शक स्‍कूल स्‍तर पर डाक टिकट क्‍लब की स्‍थापना में सहायता प्रदान करेगा और युवा डाक टिकट संग्रहकर्ताओं को मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
श्री सिन्‍हा ने कहा कि दीन दयाल ‘स्‍पर्श’ योजना, डाक‍ टिकट पर किये गये परियोजना कार्य और प्रश्‍नोत्‍तरी पर आधारित होगी। योजना की विस्‍तृत जानकारी www.postagestamps.gov.in और www.indiapost.gov.in वेबसाइटों पर उपलब्‍ध है।
डाक टिकट संग्रह रूचि, डाक टिकटों के संग्रह और इसके अध्‍ययन से जुड़ी है। इसमें संग्रह और शोध भी शामिल है। डाक टिकट संग्रह के अंतर्गत डाक टिकटों को ढूढंना, चिन्ह्ति करना, प्राप्‍त करना, सूचीबद्ध करना, प्रदर्शन करना, संग्रह करना आदि कार्य शामिल हैं। डाक टिकट संग्रह की रूचि को सभी रूचियों का राजा कहा जाता है।

9.
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने ‘चिंतन शिविर’ का उद्घाटन किया
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने आज नई दिल्‍ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला ‘चिंतन शिविर’ का उद्घाटन किया। कार्यशाला का मुख्‍य उद्देश्‍य 21वीं सदी के भारत के लिये प्रासंगिक समग्र शिक्षा प्रदान करना और विभिन्‍न गैर सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र के मुख्‍य हितधारकों तथा व्‍यक्तियों को शिक्षा क्षेत्र के महत्‍वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के लिये एकजुट करना है।

इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने कार्यशाला आयोजित करने के लिये मंत्रालय के अधिकारियों को बधाई दी और कहा कि इसके जरिये हम एक दूसरे के बेहतरीन तरीके सीख सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि कार्यशाला मुख्‍यरूप से पांच विषयों- डिजीटल शिक्षा, जीवन कौशल शिक्षा, प्रायोगिक अध्‍ययन, शारीरिक शिक्षा और नैतिक शिक्षा पर केंद्रीत है।

उन्होंने जानकारी दी कि आगामी वर्षों में देश भर के स्कूलों में ‘ऑपरेशन डिजीटल बोर्ड’ कार्य करने लगेगा। उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे विभिन्न संगठनों को देश के सभी छात्रों को डिजीटल शिक्षा प्रदान करने लिए सामग्री डालने में सहयोग तथा सामान्य डिजिटल मंच तैयार करना चाहिए। मंत्री महोदय ने कहा कि शारीरिक शिक्षा के बिना शिक्षा अधूरी है। छात्रों को स्वस्थ और तंदुरूस्त रहने के लिए अपनी पसंद के व्यायाम, योग, एरोबिक्स, दौड़ आदि करने चाहिए। मंत्री महोदय ने कहा कि जीवन कौशल शिक्षा तथा नैतिक शिक्षा आज के समय की आवश्यकता है और समग्र विकास के लिए व्यक्ति को अपने व्यवहार में इन्हें जरूर शामिल करना चाहिए।

इस अवसर पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री श्री सत्येंद्र पाल सिंह ने कहा कि शिक्षा का ध्येय मनुष्य का संपूर्ण विकास और उसमें मानवता का भाव पैदा करना है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण विकास का मतलब मनुष्य का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक विकास है। श्री सिंह ने कहा कि शारीरिक शिक्षा के ज़रिए मनुष्य का शारीरिक विकास किया जा सकता है वहीं गुणवत्तापरक शिक्षा से बुद्धिमत्ता प्राप्त की जा सकती है। हमें अपने बच्चों को जीवन के मूल्यों और शिक्षा के बारे में बताना चाहिए। उन्होंने आयोजकों का आभार व्यक्त किया और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने “स्कूली शिक्षा में बेहतरीन तौर-तरीके और आविष्कार” से जुड़े सार संग्रह तथा राज्य स्तरीय एनजीओ-सीएसआर पोर्टल “शाला सारथी” का भी उद्घाटन किया।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम में 157 संस्थाएं/विशिष्ट प्रस्तुतिकरण के ज़रिए अपने विचार साझा करेंगे। विषय के आधार पर प्रतिभागियों के ग्रुप बनाए जाएंगे और भविष्य की रूप रेखा बनाने के लिए विस्तृत चर्चा होगी जिसे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग में सचिव श्री अनिल स्वरूप, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की विशेष सचिव श्रीमती रीना राय, सीबीएसई की अध्यक्ष श्रीमती अनीता करवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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